अरे वाह ! ये तो सच में काम कर रहा है। मज़ा आ गया।
कितने दिनों बाद हिंदी में लिखने का अनंद आ रह है। यहाँ तक कि फुल्ल स्टोप भी "।" कि मात्रा में बदल जा रही है। वह वाह वाह कितना मजेदार है। हाँ ये बात ज़रुर है कि अंग्रेजी के शब्दों का इस्तेमाल करने कि temptation को हटा पाना मुश्किल है। उसकी मुख्य वजह है हिंदी के शब्दों का अभ्यास ना रहना।
गूगल ने एक और कारनामा कर दिखाया। वैसे अंग्रेजी वार्ता प्रदेश में रहने से अब तो हिंदी में सोचना भी कठिन होता जा रह है। ऐसा लग रह है जैसे बहुत मेहनत करनी पद रही है। चलो आज के लिए इतना ही काफी है। जल्दी ही मैं एक नयी सोच नयी धरना के साथ फिर आऊंगा। तब तक के लिए मेरे हिंदी भाषी मित्रों को धन्यवाद।
आपका रोहित
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