अपने देश से दूर मुझे अब २ साल हो गए और अपने घर से दूर ७ साल।
मैं इन्टरनेट का आभारी हूँ कि इतनी दूर से भी मैं अपनों कि खबर रख सकता हूँ। लेकिन ये तो बस अभी कि बात है। पिछले कुछ सालों में बहुत कुछ पीछे छूट गया है।
कुछ दिन पहले मेरी भांजी ने मुझे ओर्कुत पे add किया। सालों बाद फिर से बातें हुई। कितनी बड़ी हो गयी है वो। कालेज में है। आज मुझे ये पता चला कि मैं ७-८ महिने पहले नाना बन गया था। मुझे अहसास हुआ कि कितना कुछ पीछे छोड़ आया हूँ मैं।
समय कि धारा तो अपनी गति से बहती रहती है। अचानक बचपन कि वो सारी यादें वापस आ गयी। मैं इतना बड़ा भी नही हूँ। वो तो हमारा परिवार इतना बड़ा है कि मेरे भांजे, भांजी भी मेरे उमर के हैं। वो साथ में छुप्प-छुप्पी और लंगडी खेलना। कॉमिक बुक्स पढना और कागज़ के नाव बनाना। आज मन थोडा उदास भी है और बहुत उत्साहित भी। सबसे मिलने का कितनी इच्छा हो रही है। लेकिन जानता हूँ जब वापस जाऊंगा तब भी इतना समय नही मिलेगा कि सबसे मिल पाऊं। अब तो बस यादें ही हैं।
आजकल यादों को क़ैद करने के कितने तरीके हैं। लेकिन यादें कहॉ है। सब कितनी दूर होते जा रहे हैं।
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1 comment:
हिन्दी में चिट्ठा लिखिये - यादों को कैद करने का इससे अच्छा तरीक कोई और नहीं हो सकता।
स्वागत है हिन्दी चिट्ठाजगत में हिन्दीं और भी लिखिये।
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